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दो के विकल्प में

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अधिकतर फंसे हैं दो के विकल्प में
        
                                                    
                            
मन उड़ रहा है ख्वाबों के गल्प में
हकीकत से जब भी होगा सामना
रो-रो के पड़ेगा तब माफी मांगना
हर कोई अलग है दो एक नहीं हैं
फंसना दो दो में कभी नेक नहीं है
-कुँवर
19 घंटे पहले
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