मालूम है सीधे उसे चलना नहीं आता
ठोस रहना कठिन गलना उसे आता
आदतों कि जड़ें बहुत गहरी होती हैं
बन जाने के बाद बदलना नहीं आता
-संदीप सिंह कुँवर