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आसान नहीं इतना

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसको मालूम है कितना
        
                                                    
                            
कहाँ से हो रहा नुकसान
आदत से मजबूर हो चुका
बन रहा है अब अनजान
फंसना जाल में आसान है
मुश्किल है निकल पाना
आसान नहीं इतना
मुट्ठी में करना जमाना
-कुँवर
एक घंटा पहले
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