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मैं सबमें रहता हूँ।

Sandeep Maurya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब कभी भी मैं
        
                                                    
                            
आपके पास नहीं रहता,
तो भी मैं
आपके पास रहता हूँ।

आपके कदमों की आहट में,
रुनझुन करती
पायल की छम-छम में,
और माथे पर इठलाती
आपकी नन्ही-सी बिंदी में,
मैं सबमें रहता हूँ।

घर के हर कोने में,
रिमझिम करती
बारिश की हल्की फुहार में,
और सुबह की पहली चाय
और उसकी चुस्की में,
मैं सबमें रहता हूँ।

शाम की ढलती धूप में,
खिड़की से आती
ठंडी-सी हवा में,
और बालों को सहलाती
उस हवा की छुअन में,
मैं सबमें रहता हूँ।

रात की खामोशी में,
दिल में बहती हुई
आपकी मेरी यादों में,
आपकी आँखों में उतरती
उस हल्की-सी मुस्कान में,
मैं सबमें रहता हूँ।

और जब कभी
आप अकेली होती हैं,
बिना मुझसे कुछ कहे
मुझे बहुत याद करती हैं,
तो आप यकीन मानिए…
उस पल में भी
मैं आपके पास रहता हूँ।
एक घंटा पहले
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