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कभी हम आईना कभी उस बेवफ़ा को देख लेते हैं।।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी हम आईना कभी उस बेवफ़ा को देख लेते हैं।।
        
                                                    
                            
किसी को क्या कहें बस अपनी ख़ता को देख लेते हैं।।
न जाने कितने मिलते हैं इस चेहरे से आँखें चुराते हैं,,
करें क्या क्या जतन जीने का गुनाह को देख लेते हैं।।
न जाने कितने लम्हें होंगे जिन्हें गिनना नहीं मुमकिन,,
के जब तेरी यादें सताती है तो ख़ुदा को देख लेते हैं।।
नज़रें झुकाकर ही निकलते है हम उसकी जानिब से,,
कोई ख़तरा लगे हैं तो हम बस वज़ह को देख लेते हैं।।
दिखाई दे गया जब भी कोई कोई हँसता हुआ चेहरा,,
के आँसूं पोछकर अपने यूँहीं जफ़ा को देख लेते हैं।।
ना कोई जुस्तजू बाकी ना अब कोई आरज़ू दिल में है,,
तेरा ख़्याल आ जाए तो बस निसां को देख लेते हैं।।
बड़ा है आसमां वाला वो जो चाहेगा वही होगा देव,,
अगर गुरूर आ जाए तो बस कज़ा को देख लेते हैं।।
-सुनील देव
2 घंटे पहले
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