कोई साथ नहीं, फिर भी चलना है,
गिरकर ख़ुद ही ख़ुद को सँभलना है।
राहों में काँटे, आँखों में सपने,
अब ख़ुद के लिए ही ख़ुद को बदलना है।
सबको अपना दर्द सुनाना है,
दिल का हर बोझ मुझ पर गिराना है।
जब उनका मन हल्का हो जाता है,
फिर किसने मुझसे हाल पूछना है?
सबकी ख़ुशियों में मुस्कुराता हूँ,
सबके ग़म को अपना बनाता हूँ।
जब मेरी आँखें भर आती हैं,
मैं चुपके से आँसू पी जाता हूँ।
सबकी बातों से दिल दुखता है,
हर अपना भी पराया लगता है।
मैं सबके लिए वक़्त निकालता हूँ,
मेरा वक़्त किसी को नहीं मिलता है।
अब ख़ुद से एक वादा करना है,
हर दर्द को ताक़त में ढालना है।
जो छोड़ गए अँधेरी राहों में,
उनके बिन भी आगे बढ़ना है।
आज अँधेरा, कल उजियारा होगा,
मेरा भी एक दिन सितारा होगा।
आज भले ही कोई साथ नहीं,
कल मेरा भी वक़्त हमारा होगा।
न अब किसी से शिकायत होगी,
न झूठी उम्मीदों की आदत होगी।
जो अपना है, वो साथ निभाएगा,
बाक़ी सबसे बस दूरी होगी।
मैं टूटूँगा, लेकिन बिखरूँगा नहीं,
मुश्किलों से डरकर ठहरूँगा नहीं।
चाहे लाख अकेला छोड़ दे ज़माना,
मैं ख़ुद की नज़रों में गिरूँगा नहीं।
आज मेरी आँखों में पानी है,
कल मेरी जीत की कहानी है।
आज भले ही तन्हा हूँ मैं,
कल मेरी भी अपनी निशानी है।
एक दिन ये दिन भी बदल जाएँगे,
मेरे सूने रास्ते सँवर जाएँगे।
जिन ख़्वाबों को दबाया है मैंने,
वो ख़्वाब भी एक दिन सच हो जाएँगे।
अब अकेले चलना सीख लिया है,
ख़ुद पर भरोसा करना सीख लिया है।
दुनिया ने चाहे साथ न दिया,
मैंने ख़ुद का हाथ थाम लिया है।
कोई साथ नहीं, तो क्या ग़म है,
मेरे सीने में अब भी दम है।
आज अकेला हूँ, कल चमकूँगा,
मेरी मंज़िल मेरा अगला क़दम है।
मैं अकेला हूँ, मगर हारा नहीं,
रास्ता मुश्किल है, पर किनारा नहीं।
आज मेरी ख़ामोशी को कमज़ोरी न समझना,
मेरी कहानी का अभी आख़िरी पन्ना नहीं।