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जब खुद से मोहब्बत होने लग जाए

Saanvi Dubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हताश, अकेली, कमरे में बंद वो,
        
                                                    
                            
दुनिया से आखिर क्या चाहती है?
वो कहती है, अगर हर मांगी चीज़ मिल ही जाती,
तो दुनिया फिर चाहत किसे बताती?

हाथों में छाता होते हुए भी वो बारिश में भीग रही है,
थोड़ा सब्र रखिए जनाब, वो अभी जिंदगी जीना सीख रही है।

मौसम की तरह बदल रहा है उसका रवैया,
वो कहती है, ये पत्थर मेरे अंदर के खुद को ही दिल बनकर आजमा रहा है।

अब डर नहीं लगता कि कोई फिर से इसे तोड़ जाएगा,
अब डर नहीं लगता कि कोई फिर से इसे छोड़ जाएगा।
आप ही बताओ, इसे अब कौन दुखा पाएगा,
जब ये अल्हड़ सा पागल दिल सिर्फ खुद को चाहेगा।
8 घंटे पहले
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