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खड़ा हिमालय बता रहा है

RUPESH KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कई वर्षों से खड़ा हिमालय बता रहा है,
        
                                                    
                            
बिजली की चमक से, बादलों के गड़गड़ाहटों से,
बारिश की मारो से , सूरज की किरणों से
सहता आ रहा है,
खड़ा हिमालय बता रहा है।
कभी इंसानों की छेड़खानियों से,
कभी समुद्र गंगा गोदावरी की पानियों से,
कभी प्राकृतिक आपदाओं से,
झेलता आ रहा है
खड़ा हिमालय बता रहा है।
कभी धूप तो कभी छांव से, कभी बारूद तो कभी पथराव से,
संघर्ष करता आ रहा है।
खड़ा हिमालय बता रहा है।
कभी भूकंप से तो कभी ज्वालामुखी से
सहनशक्ति लाना है खुदी से,
सुख देख मत इतराना खुशी से
सुख और दुख आता जाता रहा है
किसी भी स्थिति में अटल रहना सीख रहा है।
खड़ा हिमालय बता रहा है।.......... 
2 दिन पहले
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