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1920 के काल पर:

romy singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            1920 के काल पर ,
        
                                                    
                            
था बर्चस्व अंग्रेजों का।
सिविल सर्विसेज के पैटर्न पर,
था कब्जा अंग्रेजी का।
मुखिया के अल्फाजों ने,
भेज कर संस्कृत को।
घमासान की टोकरी को,
रख दिया है दिमागों में।
मीडिया को भी मिल गया है,
गरम मसाला तड़का का।
अंग्रेजी और संस्कृत अब,
है लाठी दो पक्षों की।
मुखिया को पूजने वाले अब,
संस्कृत वाली लाठी को,
रख करके कंधे पर,
संस्कृत को खूब खिलाएंगे।
मुखिया से नफ़रत करने वाले,
अंग्रेजी वाली लाठी को,
रख करके कंधे पर,
अंग्रेजी का बर्चस्व दिखाएंगे।
बोस की आत्मा स्वर्ग से,
देख कर इस नज़ारे को,
मेनका और उर्वशी संग ,
मुखिया पर खूब हँसेंगी।
3 घंटे पहले
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