उठो, हुआ यह नव विहान,
करो राष्ट्र का तुम उत्थान।
अंधकार का नाश करो अब,
फूंक रहे प्रभु विजय-शान॥
तिमिर-जाल सब छिन्न हुआ है,
नूतन स्वर्णिम सूर्य उगा है।
कर्तव्य-पथ पर कदम बढ़ाओ,
सुप्त भाग्य अब जाग उठा है।
ज्ञान-दीप से करो प्रकाशित,
मन का पावन मंदिर-प्राण॥
कर्म-योग की पावन अवनी,
श्रम-बिंदु से सींचो धरणी।
सत्य, धर्म का मार्ग न तजना,
सार्थक हो जीवन की करणी।
विश्व-पटल पर गूंज उठे फिर,
भारत माँ का कीर्ति-गान॥
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'