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गीत: नव प्रभात का आह्वान

                
                                                         
                            उठो, हुआ यह नव विहान,
                                                                 
                            
करो राष्ट्र का तुम उत्थान।
अंधकार का नाश करो अब,
फूंक रहे प्रभु विजय-शान॥

तिमिर-जाल सब छिन्न हुआ है,
नूतन स्वर्णिम सूर्य उगा है।
कर्तव्य-पथ पर कदम बढ़ाओ,
सुप्त भाग्य अब जाग उठा है।
ज्ञान-दीप से करो प्रकाशित,
मन का पावन मंदिर-प्राण॥

कर्म-योग की पावन अवनी,
श्रम-बिंदु से सींचो धरणी।
सत्य, धर्म का मार्ग न तजना,
सार्थक हो जीवन की करणी।
विश्व-पटल पर गूंज उठे फिर,
भारत माँ का कीर्ति-गान॥

— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
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48 minutes ago

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