विज्ञापन

अहं भाव पर दोहे

Rohit Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अहं मिटा कर शून्य हो, तज दे द्वैत-विकार।
        
                                                    
                            
खोया जब तू स्वयं में, बचा शुद्ध साकार।।
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

jagdish bhandari

14 कविताएं

View Profile