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ताज महल

Rohit agrawal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ताज कोई मोहब्बत की निशानी नही
        
                                                    
                            
ये कोई प्यार की कहानी नहीं
लोग मरे हैं इसकी शान बड़ाने के लिए
ये मौत का किला है इसमें कोई हैरानी नहीं

लोग कहते हैं उलफ़त का महल
इसे चाँद का दीदार कहा जाता है
हाथ कटते हैं लोगों के पहले
फिर इसे ताज कहा जाता है

लोग खिंचवाते हैं फोटो महताब में इसकदर
कोई वहाँ अपनी मोहब्बत को बाँहों में ले चूमता है
अगर खुदा है ये मोहब्बत का शहर है
तो बता वो लड़का अकेला क्यूँ घूमता है

हज़ारों मोहब्बतें बिछड़ गयीं एक मोहब्बत का महल बनाने में
एक पल न लगा तुमको इसे प्यार का महल बताने में
लोग गए और घूरा इसको अपना दिल बहलाने को
क्या कोई बताएगा मुझको क्या छुपा रखा तहखाने में

मुमताज़ थी सोलहवीं बीबी तो पन्द्रह का क्यूँ कोई नाम नही
लोग मर गये जो हज़ारों उनकी मोहब्बत का क्यूँ कोई नाम नहीं

रोहित अग्रवाल
3 वर्ष पहले
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