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प्रेम और युद्ध

Rohan Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रेम पनपता है
        
                                                    
                            
गांव की पगडंडियों में
शहर से बाहर वीरान सड़कों पर
मेट्रो के किसी खाली स्टेशन पर
स्नेह जन्म लेती है
हमारे चित के भीतर

युद्ध होता है खुले मैदान में
लाठी डंडे चलते हैं मुहल्ले में
गोली मारी जाती है सरेआम चौराहों पर
दंगे भड़कते हैं भरे बाज़ार में

किसने तय किया
प्रेम भीतर और एकांत में रहेगा
और विवाद सार्वजनिक होंगे?

किसने बनाया
प्रेम को असहज?
वह मानवता का
सबसे बड़ा अपराधी है।
- रुह
एक वर्ष पहले
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