प्रेम पनपता है
गांव की पगडंडियों में
शहर से बाहर वीरान सड़कों पर
मेट्रो के किसी खाली स्टेशन पर
स्नेह जन्म लेती है
हमारे चित के भीतर
युद्ध होता है खुले मैदान में
लाठी डंडे चलते हैं मुहल्ले में
गोली मारी जाती है सरेआम चौराहों पर
दंगे भड़कते हैं भरे बाज़ार में
किसने तय किया
प्रेम भीतर और एकांत में रहेगा
और विवाद सार्वजनिक होंगे?
किसने बनाया
प्रेम को असहज?
वह मानवता का
सबसे बड़ा अपराधी है।
- रुह
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