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जल प्रदूषण

Ritesh Goel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़ी शान से कहते है हम कि
        
                                                    
                            
हम उस देश के वासी है जिस देश में गंगा बहती है,
अरे भाइयों जरा देखो ध्यान से,
उसमे कितनी गन्दगी बहती है,
पूजा करते है नदियों की,
उन्हें माता कहकर भी बुलाते है,
फिर भी कूड़ा-करकट उनमे रोज़ाना यू ही बहाते है,
दूषित हो गई है नदियां देखो सारी की सारी,
फ़ैल रही है ना जाने कैसी-कैसी बीमारी,
खुली आँखों से है दिख रहा ये सही नहीं है काम,
फिर भी श्रद्धा के दीपक से
इस अंधकार को ढकने का हम कर रहे है काम,
अगर ऐसा ही चलता रहा तो ये नदियां सूख जाएँगी,
कूड़े के ही ढेर दिखेंगे गंगा ना दिखने पाएँगी,
इस प्रदूषण के दानव को जड़ से मिटाना होगा,
नदियों को फिर से स्वच्छ और निर्मल बनाना होगा,
आओ मिल कर सब प्रण करे,
श्रद्धा के नाम पर चल रहा यह गोरख-धंधा बंद करे,
कूड़ा-करकट अब यू ही हम नदियों में नहीं बहाएंगे,
नदियों के जल को फिर से पीने लायक बनायेंगे।
जय हिंद।
रितेश गोयल 'बेसुध'
3 वर्ष पहले
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