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मां की ममता

Rishi Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जहां धूप थी घनी वहां
        
                                                    
                            
छांव बनकर तू आई।
सहे कष्ट हजारों तब
इस दुनियां में हमें लाई।।
तेरे आंचल सा सुकून
हमें कहीं ना मिला है।
सलामत हैं आज हम
ये तेरी ममता की दुआ है।।
मुश्किलें जहां की सारी
ममता के आगे झुकी हैं।
हर आती बलाएं तूने
दुजी तरफ मोड़ दी हैं।।
खुशनसीब हैं जो तेरे
आंचल में जीवन बिताया।
जी सकें जिंदगी अपनी
इस काबिल हमें बनाया।।
संघर्षों की भट्टी में तप
मां की ममता निखरी है।
निस्वार्थ प्रेम की छांव में पल
ये जिंदगी संवरी है।।
उस रब से बस इतनी सी
दुआओं का मिले सहारा।
सर पे हमेशा आंचल
सलामत रहे ये तुम्हारा ।।
एक वर्ष पहले
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