एक के बाद एक सारे कैसे?
जज़्बात हमने अपने मारे कैसे?
तुम याद ना आये मुझे, ऐसी कोई रात नहीं.
आँखों में सैलाब रुका,
हुई हमसे बरसात नहीं
होंठ सिले है मेरे तुझे पुकारें कैसे?
जज़्बात हमने अपने मारे कैसे?
था जो कभी एक तेरा सहारा
रह गया वो भी बनके एक टुटा तारा
तेरी यादों ने मुझे गुजारा,
अब इस जिंदगी को हम गुजारे कैसे?
जज़्बात हमने अपने मारे कैसे?
एक के बाद एक सारे कैसे?
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