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एक के बाद एक सारे कैसे?

Rishi Chopra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक के बाद एक सारे कैसे?
        
                                                    
                            
जज़्बात हमने अपने मारे कैसे?

तुम याद ना आये मुझे, ऐसी कोई रात नहीं.
आँखों में सैलाब रुका,
हुई हमसे बरसात नहीं
होंठ सिले है मेरे तुझे पुकारें कैसे?
जज़्बात हमने अपने मारे कैसे?

था जो कभी एक तेरा सहारा
रह गया वो भी बनके एक टुटा तारा
तेरी यादों ने मुझे गुजारा,
अब इस जिंदगी को हम गुजारे कैसे?

जज़्बात हमने अपने मारे कैसे?
एक के बाद एक सारे कैसे?

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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