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तुम नगमे बुनते रहना

Rishabh Bhatt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अधूरे वादों को अंजाम चाहिए,
        
                                                    
                            
इश्क़ को एक मुकम्मल मुकाम चाहिए,
जिसे लिख सकूं हाथों में सज़ा,
मेरी मेहंदी को ऐसा एक नाम चाहिए,

ये प्यार दीवानों का मस्ताना करता जाएगा,
ज़ाहिर है दरिया होंठों की सारी प्यास बुझाएगा,

आज जवानी डूबी है, लगता है रात सताएगा,
तुम नगमे बुनते रहना, दिल पागल होके गाएगा।

पिजरे में बंद पंछी को उड़ान चाहिए,
दिल के अरमानों को खुला आसमान चाहिए,
दस्तावेजों में मुझको बता दें,
मेरे रिश्ते को ऐसी पहचान चाहिए,

संचार तुम्हारे दिल का यूं कब तक राहें भरमाएगा?
एक इशारा दूजे से आ–आ के टकराएगा?

कस्ती से लहरें डोली हैं, साहिल पे कोई आएगा,
तुम नगमे बुनते रहना, दिल पागल होके गाएगा।
– ऋषभ भट्ट
7 महीने पहले
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