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प्रकॄति का संदेश

Ravi Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐ धरा के बुद्धिजीवी, बनते हो तुम बहुत महान।
        
                                                    
                            
चोट प्रकृति कोपहुँचाकर तुम,कहते खुद को बुद्धिमान।
बेशक बुद्धि के बल पर है, तुमने खूब विकास किया।
पर क्या सोंचा अगली पीढ़ी, का कैसे होगा उत्थान।।

अगर नही चेते तो तुमको, माफ पीढ़ियाँ नही करेंगी।
जल संरक्षण नही किये तो, याद पीढ़ियाँ नही करेंगी।
आने वाले कल की मानुष, तनिक कल्पना कर लेना,
जब होगी प्यासी धरती,और प्यासा होगा हर इंसान।।
रवि 'विद्यार्थी'
सिरसा मेजा प्रयागराज


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7 वर्ष पहले
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