जो कपड़ा मुझे आया पसंद
उसे दिवाली के लिए नहीं संजोया
जिसकी याद आई मुझे
उसको फौरन कॉल मिलाया
संजोना और शर्माना आया नहीं मुझे
नए जूतों से पगडंडी पर चलने में
मुलायम तकिये को मोड़ने में
चप्पल के साथ आने कमरे में
ऐसा है वस्तुओं से मेरा मान
तरीके से रहना आया ही नहीं मुझे
समय से पहले बस स्टैंडों पर
प्लेटफॉर्म और चाय के नुक्कड़ों पर
बिन मतलब टहलते सड़कों पर
करता रहता हूं अपनों का इंतजार
समय बचाना आया ही नहीं मुझे
आते-जाते वक्त सर झुकाकर
बिन बातों को बात बनाकर
उदासी का माहौल बनाकर
देखता रहा मैं सबका हाथ
गला लगाना आया ही नहीं मुझे