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उन प्रश्नों का क्या होगा

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उन प्रश्नों का क्या होगा,
        
                                                    
                            
जो अब तक हवा में तैर रहे हैं,
जिनके उत्तर चुप्पी ओढ़े,
किस कोने में ठहर रहे हैं।

शीतल मंद पवन बहे तो,
पुरवैया का क्या होगा,
बादल अपनी प्यास बुझाएँ,
फिर तपते सावन का क्या होगा।

नदियाँ अपनी राह बदल लें,
किनारों का फिर क्या होगा,
लहरें अगर ख़ामोश हो जाएँ,
सागर के उस शोर का क्या होगा।

आँखों में जो ख़्वाब पल रहे,
उन ख़्वाबों का क्या होगा,
दिल में जो तूफ़ान छिपा है,
उस तूफ़ान का क्या होगा।

जो सच बोलने से डरते हैं,
उन आवाज़ों का क्या होगा,
जब मौसम ही करवट लेगा,
फिर पुराने पहरों का क्या होगा।

प्रश्न बहुत हैं, उत्तर कम हैं,
फिर भी मन क्यों चुप होगा,
जब तक साँसें चलती रहेंगी,
हर सवाल का कोई तो उत्तर होगा।
-रतन कुमार कैथवास
21 घंटे पहले
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