विज्ञापन

उम्र भर का साथ निभाने को

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमेशा अपनी ही धुन में क्यों खोई रहती हो,
        
                                                    
                            
क्या कोई हिसाब छूट गया है खाते में लिखने से,
हमसे नज़रें मिलाकर यूँ चुप क्यों हो जाती हो,
क्या डर लगता है दिल की बात कहने से।

तेरी ख़ामोशी में भी कोई फ़साना लगता है,
जैसे कुछ बचा हो अभी मेरे हिस्से में कहने से,
तू मुस्कुरा दे तो सारे हिसाब भूल जाऊँ,
मुझे क्या लेना-देना अब जोड़ने या घटाने से।

तुम उलफ़त को भी शायद हिसाब समझ बैठी हो,
हम तो आए हैं उम्र भर का साथ निभाने को,
एक बार दिल खोलकर अपना राज़ बता दो,
क्या मिलेगा यूँ हर बात को छुपाने से।
-रतन कुमार कैथवास
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all