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तुमको कहीं देखा है

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पर्बतों के पत्थरों पर आज धुंध सा सवेरा है,
        
                                                    
                            
सुरमई उजालों में तुझको कहीं देखा है।

ढलती धूप ने जब घाटियों को छुआ चुपके से,
हर सुनहरी किरण में तेरा चेहरा देखा है।

बादलों की ओट से जब चाँद झाँकने आया,
उसकी आँखों में भी तेरा ही सपना देखा है।

हवा गुज़री तो शाख़ों ने सर झुका दिया जैसे,
किसी ने तेरे आने का फिर इशारा देखा है।

दूर झरनों की रवानी में तेरी आवाज़ लगी,
ख़ामोशी में भी तेरा कोई नग़्मा देखा है।

शाम ठहरी रही पहाड़ों की ढलानों पर मगर,
हमने हर रंग में तेरा ही चेहरा देखा है।
-रतन कुमार कैथवास
4 घंटे पहले
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