विज्ञापन

तुम सामने तो आओ, हम पलकों में सजा लेंगे

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम हक़ीक़त में नज़र आओ, तो महफ़िल सजा देंगे,
        
                                                    
                            
तेरे दीदार की ख़ातिर, हम कारवाँ बिछा देंगे।
यूँ बादलों की ओट से कब तक करोगे गुफ़्तगू,
तुम सामने तो आओ, हम पलकों में सजा लेंगे।

राहों में तेरी चाहत के हम दीपक जला देंगे,
तुम एक बार पुकारो, हम दुनिया भुला देंगे।
ये उलफ़त कोई क़िस्सा नहीं, जो लफ़्ज़ों में ढल जाए,
तुम सामने जो आओ, हम धड़कन सुना देंगे।

बादल भी तुम्हारे पैग़ाम लेकर आते हैं,
हवाओं के परों पर तेरे अफ़साने छाते हैं।
तुम छुपकर क्यों करते हो इनसे उलफ़त की बातें,
ज़माने की नज़रें हम पर हैं, ये सब जानते हैं।

तेरी एक झलक पर हम हर मंज़र लुटा देंगे,
जो राह में काँटे होंगे, उन्हें फूल बना देंगे।
तुम हाथ बढ़ाकर देखो, मोहब्बत की हद क्या है,
हम अपने इरादों से तक़दीर बदल देंगे।

नज़रें तमाम दुनिया की हम दोनों पर टिकी हैं,
इश्क़ की इस कहानी में कितनी निगाहें लगी हैं।
तुम हक़ीक़त में मिल जाओ, बस इतनी-सी तमन्ना,
तेरे दीदार की ख़ातिर, सदियाँ भी कम पड़ी हैं।
-रतन कुमार कैथवास
17 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all