विज्ञापन

तेरा ख्याल मेरा आफताब है

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्नेह से हमने पूछा, ये कैसा हिसाब है,
        
                                                    
                            
दिल में ख़ुदा हो तो फिर ये कैसा लिबास है।

मंदिर में ढूँढते हो, मस्जिद में ढूँढते हो,
जो दिल में बस गया हो, वो किसका जवाब है।

हमने तो उलफ़त को ही सजदा समझ लिया,
बाक़ी तुम्हारी रस्मों का अपना हिसाब है।

जिस राह पर मोहब्बत के काँटे भी फूल हों,
उस राह का हर इक क़दम ख़ुद एक किताब है।

तू मुझसे दूर होकर भी मुझमें बसा हुआ है,
तेरा ख़याल ही तो मेरा आफ़्ताब है।

अब कौन बताए मुझको वो जगह जहाँ,
इंसान हो मगर दिल में कोई ख़ुदा न हो।
-रतन कुमार कैथवास
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

RATAN KUMAR

787 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10797 कविताएं

View Profile

Ejaz Ahamad

122 कविताएं

View Profile