तुम मुस्कुरा दो तो बहारें उतरने लगें,
तुम देख लो तो काल्पनिक एहसास चले।
तुम जिस तरफ़ निगाह उठाकर देख लो,
उस ओर फिर हवाओं के कारवाँ चले।
तुम आओ तो वीरान गलियाँ भी महक उठें,
तुम जाओ तो साथ तुम्हारे ये आसमान चले।
तुम्हारे नाम से धड़कता है बारिस का बादल आज भी,
तुम ज़िक्र करो तो रूह में कोई चिंगारी जले।
मेरी तो राह में बस धूल और ख़ामोशी है,
तुम साथ हो तो काँटों पे भी गुलिस्ताँ चले।
तुम चलो तो वक़्त भी ठहरकर सलाम करे,
तुम चलो तो जैसे पूरी दास्ताँ चले।
-रतन कुमार कैथवास