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पत्थर से पानी निकलता है

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अँधेरों से कहो, अपनी हद में रहें अब,
        
                                                    
                            
इरादा हो तो पत्थर से भी पानी निकलता है।

जो हार मान ले, उसके लिए रात बहुत है,
जो जागता रहे, उसके लिए सवेरा निकलता है।
तू एक क़दम तो बढ़ा रास्ते की तरफ़,
हर मोड़ के बाद कोई रास्ता निकलता है।

तूफ़ानों की आदत है बुझाने की मगर,
किसी सीने में यक़ीं हो तो दियाला जल निकलता है।
जहाँ लोग समझते हैं कहानी ख़त्म हुई,
वहीं से फिर कोई नया सिलसिला निकलता है।
-रतन कुमार कैथवास
एक घंटा पहले
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