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लौटने के लिए, दिल में भी एक मशाल रहे

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मत उड़ा परिंदों को हवा में ऐ दोस्त,
        
                                                    
                            
हर ऊँचाई पर आशियाना नहीं मिलता।
उड़ना तो सीख जाते हैं लोग शौक़ में अक्सर,
हर उड़ने वाले को ठिकाना नहीं मिलता।

परों को खोलने से पहले ये भी सिखा देना,
किस मोड़ से लौटना है, ये भी बता देना।
आसमान की चमक में रास्ते खो जाते हैं,
उड़ान भरने वालों को ज़मीं से मिला देना।

हर खुला दरवाज़ा मंज़िल का पता नहीं होता,
हर नया रास्ता ख़ुशियों से भरा नहीं होता।
जो घर छोड़कर निकलते हैं बड़े ख़्वाब लेकर,
उनके हिस्से में लौटना हमेशा लिखा नहीं होता।

परिंदों को उड़ने दो, मगर इतना ख़याल रहे,
दूरियों के बीच भी, अपनों का कुछ सवाल रहे।
कामयाबी की चमक में, भूल न जाएँ अपना घर,
लौटने के लिए, दिल में भी एक मशाल रहे।

ऐ दोस्त, किसी के हौसलों को कमज़ोर मत करना,
उड़ान के रास्तों में बेवजह दीवार मत करना।
बस इतना समझा देना हर उड़ने वाले को,
ऊँचा ज़रूर उड़ना, मगर वापसी का रास्ता मत खोना।
-रतन कुमार कैथवास
12 घंटे पहले
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