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लगता है गलत ग्रह पर हैं

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धरती पर सौ किलो भार है, तो क्यों इतना परेशान हो भाई,
        
                                                    
                            
चाँद पे जाओ, सोलह किलो… बस इतनी-सी पहचान है।
आईने से रूठना छोड़ो, छोड़ो मन का संताप,
मोटापे का दोष नहीं है, ग्रह का है प्रताप।

बुध पर जाओ, सैंतीस किलो का दिखेगा भार,
धरती पर जो भारी बैठे, वहाँ बनोगे होशियार।
किसी ने टोका, किसी ने बोला, घटाओ अपना वज़न,
कह दो… ग्रह ही ग़लत मिला है, इसमें मेरा क्या है कसूर जनाब।

कोई डाइट का ज्ञान बाँटता, कोई देता व्यायाम,
कोई सुबह की सैर बताता, कोई गिनवाता आम।
हमने भी इक बात निकाली, सुन लो दुनिया वालों,
ग्रह बदलने का टिकट दिला दो, फिर देखो कमाल।

धरती पर गर भारी हैं तो, चाँद पे हल्के हो जाएँ,
बुध की कम गुरुत्वाकर्षण में, नए रिकॉर्ड बनाएँ।
वज़न मशीन भी सोच में पड़कर, पूछे बारंबार,
आप वही हैं या बदल गया है, ग्रहों का कारोबार?

इस दुनिया में हँसना सीखो, हर चिंता को टालो,
ख़ुद पर हँसो, मगर किसी को ताने देकर मत उछालो।
वज़न घटे या ग्रह बदलें, खुशियों का रखो हिसाब,
मोटे नहीं, बस ग्रह ग़लत है… यही कहें अपने जनाब।
-रतन कुमार कैथवास
12 घंटे पहले
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