तुम्हें पता है क्या खाना है, कब खाना है, ये जानना ज़रूरी है,
जो थाली में परोसा जाए, उसका पौष्टिक होना ज़रूरी है।
सिर्फ़ पेट भर जाए, इसे ही सेहत मत समझ लेना,
जिस्म को क्या चाहिए, इस बात को भी समझ लेना।
किसे मिल रहा है भरपेट, किसे निवाला भी नहीं,
किसके हिस्से में पोषण है, किसके हिस्से में कुछ भी नहीं।
बच्चों की थाली में दूध, दाल और फल भी पहुँचे,
हर घर के चूल्हे तक पौष्टिक आहार के पल भी पहुँचे।
काग़ज़ों में योजनाएँ बनाकर ज़िम्मेदारी पूरी न मानो,
ज़मीन पर उतरकर देखो, सच को पहचानो और जानो।
हर थाली की ख़बर रखने वाली कोई निगरानी तन्त्र होनी चाहिए,
किसी भूखे के हिस्से का निवाला न छिने… ये ज़िम्मेदारी होनी चाहिए।
'रतन', सिर्फ़ भाषणों से सेहत नहीं सँवरती समाज की,
हर इंसान की थाली तक पहुँचे ख़ुशहाली… यही जागरूकता होनी चाहिए।
-रतन कुमार कैथवास