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कुछ अधूरे ख्वाब

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसकी पलकों के साए में शायद,
        
                                                    
                            
कुछ अधूरे ख़्वाब पलते हैं।

उसकी आँखों में झाँककर देखो,
कितने मौसम वहाँ खौलते हैं,
वो ज़रा मुस्कुरा दे तो लगता है,
रात में जैसे फूल खिलते हैं।

उसकी ख़ामोश आँखों को पढ़ना,
इनमें सदियों के राज़ मिलते हैं,
जिसने देखा है एक बार उन्हें,
वो कहाँ, फिर किसी से मिलते हैं।
-रतन कुमार कैथवास
एक घंटा पहले
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