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गंदगी को वक्त दो, वो नीचे उतर के बैठ जाएगी

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब जल गंदा हो जाए, उसे हिलाया नहीं करते,
        
                                                    
                            
हर बिगड़ी हुई बात को, और बिगाड़ा नहीं करते।
कुछ वक़्त के हवाले भी कर देने चाहिए मसले,
हर उलझी हुई गाँठ को, झटके से खोला नहीं करते।

गंदगी को बैठने दो, पानी निखर जाएगा,
वक़्त की ख़ामोशी में, हर सच उभर आएगा।
जो आज नज़र आता है, ज़रूरी नहीं हक़ीक़त हो,
ठहराव का एक लम्हा भी, बहुत कुछ समझाएगा।

हर बात पर बहस करना, समझदारी नहीं होती,
हर चुप्पी किसी डर की, लाचारी नहीं होती।
कुछ लोग ख़ुद ही थककर, अपनी जगह बैठ जाते हैं,
हर जीत के लिए लड़ना, ज़रूरी नहीं होता।

जो कीचड़ उछालते हैं, उन्हें उछालने दो,
जो आग लगाते हैं, कुछ वक़्त जलने दो।
तुम अपने सब्र का दामन, हाथों से मत छोड़ना,
हर शोर के जवाब में, आवाज़ न उठने दो।

पानी हो या रिश्ते, ये उसूल याद रखना,
मुश्किल घड़ी में ख़ुद को, थोड़ा शांत रखना।
गंदगी को वक़्त दो, वो नीचे उतर के बैठ जाएगी,
हर तूफ़ान से पहले, अपने भीतर समंदर रखना।
-रतन कुमार कैथवास
एक दिन पहले
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