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भूखा सोने नहीं देती हैं

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहते हैं गंगा के पेटे में जो भी वास करता है,
        
                                                    
                            
गंगा मैया उसे कभी भूखा सोने नहीं देती हैं।

जिसके आँगन से होकर गंगा की धारा गुजरती है,
उसकी सूनी हथेली भी दुआओं से भरती है।

यहाँ रेत भी अपने भीतर कोई कहानी रखती है,
हर लहर किसी की उम्मीद की निशानी रखती है।

गंगा (प्रयाग) की जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) में कुछ ऐसी बरकत रहती है,
टूटी हुई उम्मीद भी यहाँ आकर सँवरती है।

जिसने संगम की लहरों में विश्वास उतार दिया,
उसने मुश्किल वक़्त में भी हौसला सँभाल लिया।

यहाँ गंगा केवल नदी नहीं, माँ का आँचल है,
हर थके मुसाफ़िर के लिए यही तो संबल है।

कहते हैं जिसके सिर पर गंगा मैया का हाथ रहे,
उसके घर में उम्मीद का दीपक दिन-रात रहे।

'मरहबा', यही तो प्रयाग की मिट्टी की शान है,
गंगा के आँचल में हर साँस पर भगवान भी मेहरबान है।
-रतन कुमार कैथवास
एक घंटा पहले
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