विज्ञापन

बस आईने बदलते हैं

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चेहरे धो नहीं सकते, बस आईने बदलते हैं,
        
                                                    
                            
लोग सच से बचने के बहाने बदलते हैं।
दाग़ अपने हों तो नज़रें चुरा लेते हैं,
दूसरों के लिए रोज़ पैमाने बदलते हैं।

हमने किरदार को मौसम नहीं होने दिया,
लोग मतलब के लिए कितने फ़साने बदलते हैं।
चेहरा वही रहता है, फ़ितरत वही रहती है,
बस ज़माने के हिसाब से नजारे बदलते हैं।
-रतन कुमार कैथवास
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all