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अपनी आग सम्भाल

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपनी आग सँभाल के रखना तू सीने में,
        
                                                    
                            
कोई ख़्वाबों में खलल डाले तो बता देना।

हम राख नहीं, अंगार लिए फिरते हैं सीने में,
जो हद से बढ़े, उसे उसकी हद बता देना।

हमारी ख़ामोशी को कमज़ोरी न समझ लेना,
वक़्त पड़े तो फ़ौलाद को भी पिघला देना।

तुम अपनी हद में रहना, इतना याद रखना,
हमने तूफ़ानों को भी रास्ता बदलते देखा है।

हमसे उलझने से पहले अपने क़दम तौल लेना,
हमने पत्थरों से भी चिंगारियाँ निकालते देखा है।

मेहनत से जो सपने सजाए हैं आँखों में,
उन पर नज़र उठे तो उसे आईना दिखा देना।

'रतन' ये कह दो, ये आग बुझी नहीं अब तक,
बस वक़्त आने दो… हर हिसाब चुका देना।
-रतन कुमार कैथवास
एक घंटा पहले
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