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एक सुनहरी भोर के लिए

Ranvijay Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक जीत की सुनहरी भोर के लिए
        
                                                    
                            
उम्मीदों से भरी अपनो के शोर के लिए
जाने कितने बार परे गिरना तो ग़म नहीं
चाहे परे रातों को जगना तो भी गम नहीं

चलना सीखा अभी तो गिरने का डर कैसा
हुनर है जीत का बस हौसला रखना ऐसा
तु लाख सितारो में ध्रुवतारा है ,
हाथों की लकीरों में किस्मत नहीं तुम्हारी
अपने मेहनत से तुम्हें इतिहास बनाना है ।

हारना गिरना पर तु रुकना नहीं ,
तेरे साथ खड़ी हु बस तू झुकना नहीं

पढ़ते रहो ...थकते रहो... बस रुकना मत
क्योंकि एक दिन तुम्हारी मेहनत
तुम्हारी कहानी खुद लिखेगी
2 महीने पहले
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