देखी छवि राम की मम नैनन दर्पण ,
तन मन धन जीवन भजन कीर्तन करूं अर्पण
फल फूल जल दुग्ध पंचामृत करूं तर्पण
सकल शरीर तन मन समर्पण
देखूं छवि राम की मम नैनन दर्पण ।।
सौहे कंचन मुकुट और कुंडल कर्ण पर,
पिताम्बर पहिरै कटि करधनी पादुका चरणन पर
पुष्पमाल गले भाल तिलक धनुष बाण हस्तन पर
संग लक्ष्मण सखा भाई बने सहचर ।।
सकल सुंदर सांवरी सूरती सोहय,
नैनन छवि देखि राम के मन अति मोहय
सुंदर सुरती आर नैनन से हिय बाण मारोहय
कैसे बिसारूं मैं हे सखी राम मौहे अति तड़पवोहय
रंजीत बारंबार राम भजन मगन होई गावोहय
राम बिनु अब जीवन संभव न लागोहय ।।
- रंजीत कुमार महतो "गम्हरा"