एक ओर जहां कोई पीछे ना तो हटता है और ना ही मानता अपनी है हार,
एक ओर जहां सत्य असत्य, धर्म और अधर्म के बीच बराबर खींची रहती है तलवार,
वहीं दूसरी ओर एक ही ईश्वर साधु संतों की रक्षा के लिए और सत्य धर्म की,
पुनर्स्थापना के लिए धरती पर नए-नए युगों में नए-नए रूपों में लेता है नए-नए अवतार|
-मनस्व