विज्ञापन

जमाना तेरे मेरे बीच इस इश्क का खुलेआम

Ramjeet pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो इश्क तेरे और मेरे चेहरे पर लाता है सच्ची ताजगी और सच्ची नूर जी,
        
                                                    
                            
जो इश्क न सिर्फ गम को भुला देता है बल्कि सदा के लिए कर देता है गम को दूर जी,
सचमुच उस इश्क के बगैर यह जो जमाना है सदियों से आधा अधूरा, भला वह
जमाना तेरे मेरे बीच इस इश्क का खुलेआम विरोध क्यों ना करेगा होकर मजबूर जी|
-मनस्व
9 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

416 कविताएं

View Profile

Powari Bhasha

333 कविताएं

View Profile