जो इश्क तेरे और मेरे चेहरे पर लाता है सच्ची ताजगी और सच्ची नूर जी,
जो इश्क न सिर्फ गम को भुला देता है बल्कि सदा के लिए कर देता है गम को दूर जी,
सचमुच उस इश्क के बगैर यह जो जमाना है सदियों से आधा अधूरा, भला वह
जमाना तेरे मेरे बीच इस इश्क का खुलेआम विरोध क्यों ना करेगा होकर मजबूर जी|
-मनस्व
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