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मुक्तक विन्यास में तेवरी

Ramesh Raj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुक्तक विन्यास में तेवरी
        
                                                    
                            
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आजकल मौसम है प्रतिकूल
डाल पर एक नहीं है फूल |
दीखता घना तिमिर हर ओर
व्यवस्था बदल गयी आमूल ||

उड़े अब सिर्फ धूल ही धूल
खड़े हैं चारों ओर बबूल |
कहाँ से लायें पुष्प-सुगंध
हमारे हिस्से आये शूल ||

हिलीं जीवन की सारी चूल
हवाई निकला हर स्थूल |
ज़िन्दगी-भर का दुष्परिणाम
करी थी बस थोड़ी-सी भूल ||
-रमेशराज
एक घंटा पहले
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