संयत रख अपना मन छोरे
माना तुझ पे यौवन छोरे,
तेरे सब पंख झुलसने हैं
मत सम्पाती तू बन छोरे |
अब बीत गया बचपन छोरे
तू बदल कल्प चिन्तन छोरे,
माँ को मत लाइन बीच लगा
तू लेकर आ राशन छोरे |
है भला नहीं क्रन्दन छोरे
तू दयावान कुछ बन छोरे,
कुछ जिधर कबूतर बैठे हैं
क्यों तान रहा तू ‘गन’ छोरे |
-रमेशराज
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