समय का एक लंबा सफर है
जो बिना शोर के
धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहता है।
साल शुरू होता है
उम्मीदों के दीयों के साथ,
दिनों के मोतियों की माला बनती है,
फिर अनजाने ही
सब कुछ पीछे रह जाता है।
एक और नया साल आ जाता है
नयी तारीखों के साथ,
नये संकल्पों,
नई उम्मीदों,
नये सपनों की फुसफुसाहट के साथ।
कैलेंडर के पन्ने बिना रुके
हर सुबह बदलते रहते हैं,
लेकिन दिल के भीतर
कितनी ही बातें
ज्यों की त्यों रह जाती हैं
ज़िंदगियाँ सिसकती रहती हैं।
दुनिया लगातार भागती रहती है,
रास्ते बदलते रहते हैं,
मंज़िलें भी बदलती हैं,
पर समय की रफ़्तार
किसी अदृश्य धागे में बंधी
उतनी ही रहती है
समय न रुकता है, न थमता है
न दायें बाएँ देखता है
बस दौड़ता रहता है
कुछ नहीं बदलता सच में !
बस शुभकामनाएँ आती हैं,
शुभकामनाएँ जाती हैं
कुछ चेहरे मुस्कुराते हैं,
कुछ हाथ थामें जाते हैं,
कुछ साथ छूट जाते हैं
सब अपने-अपने रास्तों पर
चुपचाप चलते जाते हैं
तारीख़ें बदलती रहती हैं
समय चलता रहता है।
उनके बीच
कुछ लंबी तनहाइयाँ होती हैं
जो रातों को जागती रहती हैं,
तकियों पर गिरते आँसुओं से
धीरे-धीरे बातें करती रहती हैं।
फितरतें भी तो वही रहती हैं,
लोग बदलते नहीं,
सिर्फ कई चेहरों पर
नई नक़्शाकारी हो जाती है।
मंजर बदल जाते हैं,
खिड़कियों के बाहर
नए मौसम आ जाते हैं,
पर भीतर का मौसम
कभी-कभी वैसे ही ठहरे रहते है।
तारीख़ें दोहराती रहती हैं खुद को,
साल बदलते रहते हैं,
और हम !!!
हर बार सोचते हैं कि
शायद इस दफा कुछ बदलेगा।
इसी आशा में जिए जाते हैं
संकल्प किए जाते हैं
बधाइयाँ दिये जाते हैं
जिंदगी अपना काम करती रहती है,
धीरे-धीरे सिखाती रहती है
कि हर गुजरता लम्हा
एक पाठ है,
एक दुआ है,
एक सच है।
और अंत में !!
बस यही बात समझ आती है
कि यह समय का सिलसिला है
जो सदा चलता रहता है,
और हम सब !!
उसके साथ चलते रहना सीख जाते हैं।
नववर्ष की बधाईयां लेते देते हैं
दुखों को भूल कर
नए संकल्प लेते हैं
नए कैलेंडर के साथ मुस्कुराते हैं
उम्मीदों के दियों के साथ
नववर्ष मनाते हैं
उसका दिल से स्वागत करते हैं
- रमा पूर्णिमा शर्मा