मैं शिव हूँ
मै ही आदि हूँ
मैं ही अन्त हूँ
मैं सर्वव्यापी,
मैं ही अनन्त हूँ
मैं शिव हूँ
कालों का काल हूँ
मैं ही महाकाल हूँ
जीवन का आगाज़ हूँ
सृष्टि का विनाश हूँ
मै शिव हूँ
बहती हुई तरंग हूँ
अवगढ़ हूँ मलंग हूँ
भूत प्रेत साथ हैं
शमशान में निवास है
मैं शिव हूँ
मैं भूत हूँ भविष्य हूँ वर्तमान हूँ
मै ही चाँद, सूरज और आसमान हूँ
मै मृत्यु, दया और क्रोध हूँ
मै ही ज्ञानी, मनीषी और अबोध हूँ
मैं शिव हूँ
मैं अनाहद नाद हूँ
दैत्य, दानव, मनुज, गन्धर्व सभी का विश्वास हूँ
अपनी धुन में मस्त हूँ
मैं ही समस्त हूँ
मैं शिव हूँ
योग का आरम्भ हूँ
ध्वनि का प्रारम्भ हूँ
फक्कड़ हूँ अवधूत हूँ
त्याग का स्वरूप हूँ
मैं शिव हूँ
वीभत्स हूॅ विभोर हूँ
भाँग के नशे में चूर हूँ
अल्हड़ हूँ मदमस्त हूँ
हाँ मैं ही समस्त हूँ
मैं शिव हूँ
ज्ञानियों का ज्ञान हूँ
मैं ही परम ध्यान हूॅ
समझ से परे हूँ
मैं महाविज्ञान हूँ
मैं शिव हूँ
नीति नियन्ता हूँ
दुष्टों की चिन्ता हूँ
भक्तों का प्राण हूँ
सृष्टि का प्रमाण हूँ
मैं शिव हूँ
आसक्ति से दूर हूँ
मैं ही अघोर हूँ
दानी मशहूर हूँ
भक्तों का गुरूर हूँ
मैं शिव हूँ
मैं निर॓कार हूँ
मैं ही ओंकार हूँ
संतों में महासन्त हूँ
एकमेव सत्य हूँ
मैं शिव हूँ मैं शिव हूँ मैं शिव हूँ
- राकेश कुमार सिंह "सागर"
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।