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इन दिल के बिखरे पन्नो को,

Raju Verma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इन दिल के बिखरे पन्नो को,
        
                                                    
                            
....कुछ यादों को कुछ अपनों को(2),
कैसे अब मैं समेटुंगा,
....कुछ यारों को कुछ सपनों को (2),
वो पल भी कुछ काम का था,
....खुशियों का कोई दाम ना था,
अब फीकी फीकी सारी दुनिया,
....कैसे अब मैं समेटूंगा,
उन खुशियों में क्या फिर लौटूंगा,
उन खुशियों में क्या फिर लौटूंगा,
एक घंटा पहले
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Anil Pandey

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