इन दिल के बिखरे पन्नो को,
....कुछ यादों को कुछ अपनों को(2),
कैसे अब मैं समेटुंगा,
....कुछ यारों को कुछ सपनों को (2),
वो पल भी कुछ काम का था,
....खुशियों का कोई दाम ना था,
अब फीकी फीकी सारी दुनिया,
....कैसे अब मैं समेटूंगा,
उन खुशियों में क्या फिर लौटूंगा,
उन खुशियों में क्या फिर लौटूंगा,
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