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मर चुका वो समाज

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बरदाश्त कर लेना चंद नखरे
        
                                                    
                            
मुहब्बत में अच्छी बात है,
मर चुका वह समाज जहाँ
झूठ क़ाबिल-ए-बरदाश्त है.

 
एक घंटा पहले
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