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कुर्सी और मय

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मय और कुर्सी का नशा उतना ही,
        
                                                    
                            
जितना संभालने की ताक़त हो,
बैठना हो जाय मेहफिल में गर,
तो बैठना सिर्फ मज़े की बाबत हो.

 
एक घंटा पहले
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