मय और कुर्सी का नशा उतना ही,
जितना संभालने की ताक़त हो,
बैठना हो जाय मेहफिल में गर,
तो बैठना सिर्फ मज़े की बाबत हो.
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X